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श्लोक 2.1.258  |
तबे रूप - गोसाञि र पुनरागमन ।
ताँहार हृदये कैल प्रभु शक्ति - सञ्चारण ॥258॥ |
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| अनुवाद |
| जगन्नाथ पुरी में श्रील रूप गोस्वामी पुनः भगवान से मिले और भगवान ने उनके हृदय में समस्त दिव्य शक्ति भर दी। |
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| Srila Rupa Goswami met Mahaprabhu again at Jagannatha Puri. Mahaprabhu infused all divine power into his heart. |
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