श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.1.23 
तार मध्ये छय वत्सर भक्त - गण - सङ्गे ।
प्रेम - भक्ति प्रवर्ताइला नृत्य - गीत - रङ्गे ॥23॥
 
 
अनुवाद
जगन्नाथपुरी में बिताए इन अठारह वर्षों में से, श्री चैतन्य महाप्रभु ने छह वर्ष अपने अनेक भक्तों के साथ बिताए। उन्होंने कीर्तन और नृत्य के माध्यम से भगवान की प्रेममयी सेवा का परिचय दिया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu spent six of these eighteen years in Jagannatha Puri with his many devotees. He propagated the loving devotional service of the Lord through kirtan and dance.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd