मथुरा याइब आमि एत लोक सङ्गे ।
किछु सुख ना पाइब, हबे रस - भङ्गे ॥229॥
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अनुवाद
भगवान ने सोचा, "यदि मैं अपने पीछे इतनी भीड़ लेकर मथुरा जाऊँगा, तो यह कोई बहुत अच्छी स्थिति नहीं होगी, क्योंकि वातावरण अशांत हो जाएगा।"
Mahaprabhu thought, “If I go to Mathura with such a large crowd, it will not be good; because it will create unrest in the atmosphere.”
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा कि वृंदावन जैसी पवित्र जगह पर इतने लोगों के साथ जाना बस विघटनकारी है। वह उस तरह से पवित्र जगहों पर जाकर वो खुशी हासिल नहीं कर पाएंगे जिसकी उन्हें लालसा थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥