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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ
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श्लोक 226
श्लोक
2.1.226
एत ब लि’ चरण व न्दि’ गेला दुइ - जन ।
प्रभुर सेइ ग्राम हैते चलिते हैल मन ॥226॥
अनुवाद
ऐसा कहकर दोनों भाइयों ने भगवान के चरणकमलों की वंदना की और अपने घर लौट गए। तब भगवान चैतन्य महाप्रभु ने उस गाँव को छोड़ने की इच्छा व्यक्त की।
Saying this, both the brothers worshipped the lotus feet of Mahaprabhu and returned to their home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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