श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  2.1.201 
सत्य एक बात कहों, शुन, दयामय ।
मो - विनु दयार पात्र जगते ना हय ॥201॥
 
 
अनुवाद
"हम एक बात कहें जो बिलकुल सच्ची हो। हे दयालु, हमारी बात ध्यान से सुनें। तीनों लोकों में हमारे सिवा दया का कोई पात्र नहीं है।"
 
"We are telling the absolute truth. O Merciful One! Please listen to this. In the three worlds, there is no one more worthy of mercy than us."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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