श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.1.20 
ताहाँ येइ लीला, तार ‘मध्य - लीला’ नाम ।
तार पाछे लीला - ‘अन्त्य - लीला’ अभिधान ॥20॥
 
 
अनुवाद
उन स्थानों पर भगवान द्वारा की गई सभी लीलाएँ मध्यलीला कहलाती हैं और उसके बाद जो भी लीलाएँ की गईं, वे अन्त्यलीला कहलाती हैं।
 
The pastimes performed by Mahaprabhu in these places are called Madhya-Lila and the pastimes that followed are called Antya-Lila.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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