श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  2.1.193 
ब्राह्मण - जाति तारा, नवद्वीपे घर ।
नीच - सेवा नाहि करे, नहे नीचेर कूर्पर ॥193॥
 
 
अनुवाद
"जगै और माधाई भाई ब्राह्मण जाति के थे और उनका निवास नवद्वीप के पवित्र स्थान पर था। उन्होंने कभी निम्न वर्ग के लोगों की सेवा नहीं की, न ही वे घृणित कार्यों में शामिल हुए।"
 
"The two brothers Jagai and Madhai belonged to the Brahmin caste and resided in the holy land of Navadvipa. They had never served lowly men, nor had they become instruments of lowly deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)