श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.1.19 
तार मध्ये छय वत्सर - गमनागमन ।
नीलाचल - गौड़ - सेतुबन्ध - वृन्दावन ॥19॥
 
 
अनुवाद
पिछले चौबीस वर्षों में से छः वर्षों तक श्री चैतन्य महाप्रभु ने जगन्नाथ पुरी से बंगाल तक तथा केप कोमोरिन से वृन्दावन तक सम्पूर्ण भारत की यात्रा की।
 
For six of his last twenty-four years, Sri Chaitanya Mahaprabhu travelled throughout India, from Jagannath Puri to Bengal and from Cape Comorin to Vrindavan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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