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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  2.1.189 
नीच - जाति, नीच - सङ्गी, करि नीच काज ।
तोमार अग्रेते प्रभु कहिते वासि लाज ॥189॥
 
 
अनुवाद
"महाशय, हम लोग सबसे निम्न वर्ग के हैं, और हमारे साथी और रोज़गार भी सबसे निम्न स्तर के हैं। इसलिए हम आपको अपना परिचय नहीं दे सकते। आपके सामने खड़े होकर हमें बहुत शर्म आ रही है।"
 
"My lord, we are of low caste, and our companions and our jobs are also low-class. Therefore, we cannot introduce ourselves to you. We feel extremely ashamed to stand here before you.
तात्पर्य
यद्यपि दोनों भाई रूप और सनातन (उस समय दबीरा ख़ासा और साकर मल्लिका) ने स्वयं को एक निम्न कुल में जन्मे हुए रूप में प्रस्तुत किया। फिर भी वे सबसे प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार से थे जो मूल रूप से कर्णाटक से था। इस प्रकार वे वास्तव में ब्राह्मण जाति के थे। दुर्भाग्य से, मुस्लिम सरकारी सेवा से जुड़े होने के कारण उनके रीति-रिवाज और व्यवहार मुसलमानों के सदृश्य थे। इसलिए उन्होंने स्वयं को नीच-जाति के रूप में प्रस्तुत किया। जाति शब्द का अर्थ जन्म होता है। शास्त्र के अनुसार, तीन प्रकार के जन्म होते हैं। पहला जन्म माँ के गर्भ से है, दूसरा जन्म सुधारात्मक पद्धति की स्वीकृति है, और तीसरा जन्म आध्यात्मिक गुरु द्वारा स्वीकृति (दीक्षा) है। कोई भी घृणित पेशे को अपनाने या स्वाभाविक रूप से घृणित लोगों के साथ जुड़ने से घृणित हो जाता है। दबीरा ख़ासा और साकर मल्लिका, जैसे और दबीरा ख़ासा और साकर मल्लिका, मुसलमानों के साथ जुड़े थे, जो स्वाभाविक रूप से ब्राह्मण संस्कृति और गो रक्षा के विरोधी थे। श्रीमद्-भागवतम (सप्तम खंड) में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति एक निश्चित वर्गीकरण से संबंधित होता है। एक व्यक्ति शास्त्रों में वर्णित विशेष लक्षणों द्वारा पहचाना जा सकता है। किसी के लक्षणों से, यह पता चल जाता है कि वह एक निश्चित जाति का है। दबीरा ख़ासा और साकर मल्लिका दोनों ही ब्राह्मण जाति के थे, लेकिन चूंकि वे मुसलमानों द्वारा नियोजित थे, इसलिए उनकी मूल आदतें मुस्लिम समुदाय की आदतों में बदल गईं। चूंकि ब्राह्मण संस्कृति के लक्षण लगभग शून्य थे, इसलिए उन्होंने खुद को सबसे निम्न जाति के रूप में पहचाना। भक्ति-रत्नाकर में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि क्योंकि साकर मल्लिका और दबीरा ख़ासा निम्न वर्ग के लोगों से जुड़े थे, इसलिए उन्होंने खुद को निम्न वर्गों से संबंधित बताया था। वास्तव में, हालाँकि, वे प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवारों में पैदा हुए थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)