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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 184
 
 
श्लोक  2.1.184 
ताँरा दुइ - जन जानाइला प्रभुर गोचरे ।
रूप, साकर - मल्लिक आइला तोमा’ देखिबारे ॥184॥
 
 
अनुवाद
श्री नित्यानंद प्रभु और हरिदास ठाकुर ने भगवान चैतन्य महाप्रभु को बताया कि दो व्यक्तित्व - श्री रूप और सनातन - उनसे मिलने आए थे।
 
Sri Nityananda Prabhu and Haridas Thakura found Sri Chaitanya Mahaprabhu and two devotees – Sri Rupa and Sanatana – had come to see him.
तात्पर्य
संस्कृत मल्लिका सनातन गोस्वामी का नाम था, और दबीर खाँसा रुप गोस्वामी का नाम था। वह मुसल्मान राजा की सेवा में इन नामों से जाने जाते थे इसीलिए ये उनके मुसल्मान नाम हैं। अधिकारी होते हुए भाइयों ने हर तरह के मुसल्मान रीति रिवाज अपना रखे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)