श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.1.179 
तोमार चित्ते चैतन्येरे कैछे हय ज्ञान ।
तोमार चित्ते येइ लय, सेइ त’ प्रमाण ॥179॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्रील रूप गोस्वामी ने श्री चैतन्य महाप्रभु को जानने के लिए राजा को अपने मन की बात बताई। उन्होंने राजा को आश्वस्त किया कि उनके मन में जो कुछ भी घटित होता है, उसे प्रमाण माना जा सकता है।
 
Thus Srila Rupa Goswami told the king that his mind was a means of knowing Sri Chaitanya Mahaprabhu. He assured the king that whatever came to his mind was his only proof.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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