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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.1.151 
पञ्च - दिन देखे लोक नाहिक विश्राम ।
लोक - भये रात्रे प्रभु आइला कुलिया - ग्राम ॥151॥
 
 
अनुवाद
पाँच दिन तक लगातार सभी लोग भगवान के दर्शन के लिए एकत्रित हुए, फिर भी उन्हें कोई शांति नहीं मिली। भीड़ के भय से भगवान चैतन्य महाप्रभु रात में ही वहाँ से निकलकर कुलिया (वर्तमान नवद्वीप) नगर में चले गए।
 
People continued to come to see Mahaprabhu for five days, and he found no rest. Fearing the crowds, Mahaprabhu left at night and went to a village called Kuliya (present-day Navadwip).
तात्पर्य
यदि कोई चैतन्य-भागवत के वक्तव्यों पर विचार करे साथ ही लोचन दास ठाकुर के वर्णन पर, तो यह स्पष्ट है कि वर्तमान नबद्वीप को पहले कुलिया-ग्राम के नाम से जाना जाता था। कुलिया-ग्राम में ही श्री चैतन्य महाप्रभु ने देवानंद पंडित पर अपना अनुग्रह बरसाया और गोपाल चापल और बहुत से अन्य लोगों को मुक्त किया, जिन्होंने पहले उनके चरण कमलों में अपराध किए थे। उस समय विद्यानगर से कुलिया-ग्राम जाने के लिए गंगा की एक धारा को पार करना पड़ता था। वे सभी पुराने स्थान अब भी विद्यमान हैं। चिनडांग पहले कुलिया-ग्राम में स्थित था, जिसे अब कोलेरा गंजा के नाम से जाना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)