श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.1.14 
भक्ति क रि’ शिरे धरि ताँहार चरण ।
शेष - लीलार सूत्र - गण करिये वर्णन ॥14॥
 
 
अनुवाद
अब मैं भगवान के चरणकमलों को अपने सिर पर रखकर उनकी अन्तिम लीलाओं का संक्षेप में वर्णन करूँगा।
 
Now, with utmost devotion, holding His lotus feet on my head, I will briefly describe the last pastimes (Sheshlila) of Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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