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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.1.120 
ब्रह्म - संहिता, कर्णामृत, दुइ पुँथि पाञा ।
दुइ पुस्तक लञा आइला उत्तम जानिञा ॥120॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु को दो अन्य ग्रंथ भी मिले - ब्रह्मसंहिता और कृष्णकर्णामृत। इन ग्रंथों को उत्कृष्ट जानकर, वे उन्हें अपने भक्तों को भेंट करने के लिए ले गए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu received two more texts—the Brahma-Samhita and the Krishnakarnamrita. Considering these texts to be excellent, he brought them to present to his devotees.
तात्पर्य
पुराने दिनों में प्रेस नहीं थे, और सभी महत्त्वपूर्ण लेख हाथ से लिखे जाते थे और उन्हें बड़े मंदिरों में रखा जाता था। चैतन्य महाप्रभु को ब्रह्म-संहिता और कृष्ण-कर्णामृत हाथ से लिखे पाठों में मिले और उन्हें बहुत ही प्रमाणिक जानकर, वे उन्हें अपने भक्तों के लिए प्रस्तुत करने ले गए। निश्चित रूप से, उन्होंने मंदिर के अधीक्षक से अनुमति प्राप्त की। अब ब्रह्म-संहिता और कृष्ण-कर्णामृत दोनों, श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की टीकाओं के साथ प्रिंट में उपलब्ध हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)