Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
इसके बाद, भगवान चैतन्य महाप्रभु ने प्रसिद्ध सप्त-ताल वृक्षों का उद्धार किया, सेतुबंध रामेश्वर में स्नान किया और रामेश्वर के नाम से प्रसिद्ध भगवान शिव के मंदिर का दौरा किया।
After this, Lord Sri Chaitanya Mahaprabhu saved the famous Saptatal trees, took bath in Setubandha Rameshwar and visited the temple of Lord Shiva i.e. Rameshwar.
तात्पर्य
ऐसा कहा जाता है कि सप्त-ताल वृक्ष बहुत पुराने, विशाल ताड़ के वृक्ष थे। एक बार वाली और उसके भाई सुग्रीव के बीच लड़ाई हुई थी, और भगवान रामचंद्र सुग्रीव के पक्ष में थे और उन्होंने वाली को मार डाला, और खुद को उन प्रसिद्ध पेड़ों में से एक के पीछे रखा। जब भगवान चैतन्य महाप्रभु ने दक्षिण भारत का दौरा किया, तो उन्होंने उन पेड़ों को गले लगाया, जिन्हें जीवित किया गया और सीधे वैकुंठ में स्थानांतरित कर दिया गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥