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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.1.106 
तबे त’ पाषण्डि - गणे करिल दलन ।
अहोवल - नृसिंहादि कैल दरशन ॥106॥
 
 
अनुवाद
तिरुमला और तिरुपति के मंदिरों के दर्शन करने के बाद, श्री चैतन्य महाप्रभु को कुछ नास्तिकों का दमन करना पड़ा। इसके बाद वे अहोवल-नृसिंह मंदिर गए।
 
After visiting the Tirumala and Tirupati temples, Sri Chaitanya Mahaprabhu had to quell some atheists. He then visited the Ahowal-Nrisimha Temple.
तात्पर्य
आहोवाला मंदिर दक्षिण भारत में कर्नूल जिले के सारबेला उपखंड में स्थित है। पूरे जिले में यह बहुत प्रसिद्ध मंदिर लोगों द्वारा बहुत सराहा जाता है। इसके अलावा आठ अन्य मंदिर भी हैं, और उन सभी को न्यू-नृसिंह मंदिरों के नाम से जाना जाता है। इन मंदिरों में बहुत बढ़िया वास्तुकला और कलात्मक नक्काशी का काम है। हालाँकि, जैसा कि स्थानीय गजट, कर्नूल मैनुअल में कहा गया है, काम पूरा नहीं हुआ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)