श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 1: श्री चैतन्य महाप्रभु की परवर्ती लीलाएँ  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.1.102 
तबे त’ करिला प्रभु दक्षिण गमन ।
कूर्म - क्षेत्रे कैल वासुदेव विमोचन ॥102॥
 
 
अनुवाद
सार्वभौम भट्टाचार्य पर कृपा करके भगवान दक्षिण भारत की ओर चल पड़े। कूर्मक्षेत्र पहुँचकर उन्होंने वासुदेव नामक एक व्यक्ति का उद्धार किया।
 
After bestowing His favor upon Sarvabhauma Bhattacharya, Mahaprabhu set out for South India. When He arrived at Kurmakshetra, He rescued a man named Vasudeva.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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