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श्लोक 2.1.102  |
तबे त’ करिला प्रभु दक्षिण गमन ।
कूर्म - क्षेत्रे कैल वासुदेव विमोचन ॥102॥ |
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| अनुवाद |
| सार्वभौम भट्टाचार्य पर कृपा करके भगवान दक्षिण भारत की ओर चल पड़े। कूर्मक्षेत्र पहुँचकर उन्होंने वासुदेव नामक एक व्यक्ति का उद्धार किया। |
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| After bestowing His favor upon Sarvabhauma Bhattacharya, Mahaprabhu set out for South India. When He arrived at Kurmakshetra, He rescued a man named Vasudeva. |
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