श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.8.82 
चैतन्य - लीलाते ‘व्यास’ वृन्दावन - दास ।
ताँर कृपा विना अन्ये ना हय प्रकाश ॥82॥
 
 
अनुवाद
श्रील वृन्दावन दास ठाकुर भगवान चैतन्य की लीलाओं के प्रामाणिक लेखक हैं। अतः उनकी कृपा के बिना इन लीलाओं का वर्णन संभव नहीं है।
 
Srila Vrindavana Dasa Thakura is the authoritative author of the pastimes of Chaitanya Mahaprabhu. Therefore, these pastimes cannot be described without his grace.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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