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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.8.79 
सेइ लिखि, मदन - गोपाल ये लिखाय ।
काष्ठेर पुत्तली येन कुहके नाचाय ॥79॥
 
 
अनुवाद
जैसे जादूगर लकड़ी की गुड़िया को नचाता है, वैसे ही मैं मदनगोपाल के आदेशानुसार लिखता हूँ।
 
Just as a magician makes a puppet dance, in the same way I write whatever Madangopal orders me.
तात्पर्य
यह एक विशुद्ध भक्त की स्थिति है। किसी को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए, बल्कि भगवान के व्यक्तित्व के प्रति समर्पित होना चाहिए, जो उसे आंतरिक चैत्य-गुरु या आध्यात्मिक गुरु के रूप में निर्देश देगा। भगवान एक भक्त का आंतरिक और बाह्य दोनों तरह से मार्गदर्शन करना पसंद करते हैं। आंतरिक रूप से वह अध्यात्म के रूप में उसका मार्गदर्शन करते हैं, और बाहरी रूप से वह उसे आध्यात्मिक गुरु के रूप में मार्गदर्शन करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)