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अनुवाद
इन सभी भक्तों की कृपा से मुझे श्री चैतन्य महाप्रभु की अंतिम लीलाओं का वर्णन लिखने का आदेश मिला। उन्हीं के आदेश से, यद्यपि मैं निर्लज्ज हूँ, मैंने यह चैतन्य-चरितामृत लिखने का प्रयास किया है।
All these devotees graciously commissioned me to write about the final pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu. Although I am shameless, I have attempted to write this Chaitanya Charitamrita at their behest.
तात्पर्य
भगवान के दिव्य लीलाओं के बारे में लिखना एक सामान्य प्रयास नहीं है। जब तक कोई उच्च अधिकारियों या उन्नत भक्तों द्वारा अधिकार प्राप्त नहीं है, कोई भी दिव्य साहित्य नहीं लिख सकता है, क्योंकि ऐसा सभी साहित्य संदेह से ऊपर होना चाहिए, या दूसरे शब्दों में, इसमें किसी सशर्त आत्मा के दोष नहीं होने चाहिए, जैसे कि गलतियों, भ्रम, धोखा और अपूर्ण ज्ञान धारणा। कृष्ण के शब्द और कृष्ण के आदेशों को ले जाने वाले शिष्य परंपरा वास्तव में आधिकारिक हैं। दिव्य साहित्य लिखने के लिए अधिकार प्राप्त होना एक विशेषाधिकार है जिसमें एक लेखक बहुत गर्व कर सकता है। एक विनम्र वैष्णव के रूप में, कृष्णदास कविराज गोस्वामी, इस प्रकार अधिकार प्राप्त करके, बहुत शर्मिंदा महसूस किया कि वह वही थे जिन्हें भगवान चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का वर्णन करना था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥