श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.8.60 
ताँहार अनन्त गुण के करु प्रकाश ।
ताँर प्रिय शिष्य इँह - पण्डित हरिदास ॥60॥
 
 
अनुवाद
अनंत आचार्य समस्त गुणों के भंडार थे। उनकी महानता का कोई अनुमान नहीं लगा सकता। पंडित हरिदास उनके प्रिय शिष्य थे।
 
Anant Acharya was the embodiment of all virtues. No one can estimate his greatness. Pandit Haridas was his favorite disciple.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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