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अनुवाद
श्री चैतन्य चरितामृत के इन कथनों पर विश्वास न करने वाले तथाकथित विद्वान् विद्वानों द्वारा विकसित की गई शिक्षा, मेंढकों के शोरगुल वाले टर्राने के समान है।
The pursuit of the teachings by such so-called scholars who do not believe in these statements of Sri Chaitanya Charitamrita is like the loud croaking of frogs.
तात्पर्य
बारिश के मौसम में वनों में मेंढकों का टर्राने का स्वर बड़ा ही अधिक गूंजता है जिससे अंधकार में सांप भी उस टर्राने की ध्वनि को सुन कर पास आ जाते हैं और उन मेंढकों को निगल जाते हैं। उसी प्रकार विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की तथाकथित विद्वतापूर्ण ध्वनियाँ जिनमें आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव हो तो वैसी ही मेंढकों के टर्राने के समान होती हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥