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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.8.57 
कृष्णेर ये साधारण सद्गुण पञ्चाश ।
से सब गुणेर ताँर शरीरे निवास ॥57॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण के पचासों गुण उनके शरीर में विद्यमान थे।
 
Fifty qualities of Lord Krishna were present in his body.
तात्पर्य
भक्ति-रसामृत-सिन्धु में श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों का वर्णन किया गया है। इनमें से पचास प्रमुख हैं (अयं नेता सु-रम्याङ्गः, इत्यादि), और अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में वे सभी श्री हरिदास पंडित के शरीर में विद्यमान थे। चूँकि हर जीव सर्वोच्च भगवान का एक अंश है, इसलिए श्रीकृष्ण के ये पचासों सद्गुण मूल रूप से सूक्ष्म रूप से हर जीव में विद्यमान होते हैं। भौतिक प्रकृति के संपर्क के कारण, ये गुण बद्ध आत्मा में दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब कोई एक शुद्ध भक्त बन जाता है, तो वे सभी स्वतः ही प्रकट हो जाते हैं। इसका उल्लेख श्रीमद्-भागवतम (5.18.12) में किया गया है, जैसा कि नीचे दिए गए पाठ में उल्लेख किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)