vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना
»
श्लोक 42
श्लोक
1.8.42
ताँर कि अद्भुत चैतन्य - चरित - वर्णन ।
याहार श्रवणे शुद्ध कैल त्रि - भुवन ॥42॥
अनुवाद
भगवान चैतन्य की लीलाओं का कितना अद्भुत वर्णन किया है उन्होंने! तीनों लोकों में जो कोई इसे सुनता है, वह पवित्र हो जाता है।
Ah! What a wonderful description of the pastimes of Lord Chaitanya! Anyone who listens to it in all three worlds becomes pure (pure).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×