अम्बिकायाः ससृजा यसीन नाम श्रीलकीलम्बिका
कृष्णोच्छिष्टं प्रभुंज्याना सेयं नारायणी मता
जब भगवान कृष्ण एक बच्चे थे, तब उनका पालन-पोषण अम्बिका नामक एक महिला द्वारा किया गया था, जिसकी एक छोटी बहन थी जिसका नाम कीलम्बिका था। भगवान चैतन्य के अवतार के समय, वही कीलम्बिका भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा छोड़े गए भोजन के अवशेष खाती थी। वह कीलम्बिका नारायणी थी, जो श्रीवास ठाकुर की भतीजी थी। बाद में, जब वह बड़ी हुई और विवाहित हुई, तो श्रील वृंदावन दास ठाकुर उससे पैदा हुए। भगवान श्री कृष्ण के भक्त को भगवान के प्रति समर्पित भक्ति सेवा के रूप में माना जाता है; इस प्रकार हम श्रील वृंदावन दास ठाकुर को नारायणी के पुत्र के रूप में जानते हैं। श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने इस संबंध में टिप्पणी की है कि उसके पितृ वंश का कोई संदर्भ नहीं है क्योंकि इसे समझने की कोई आवश्यकता नहीं है।
