श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.8.35 
वृन्दावन - दास कैल ‘चैतन्य - मङ्गल’ ।
याँहार श्रवणे नाशे सर्व अमङ्गल ॥35॥
 
 
अनुवाद
ठाकुर वृन्दावन दास ने श्री चैतन्य-मंगल की रचना की है। इस पुस्तक को सुनने से सभी दुर्भाग्य नष्ट हो जाते हैं।
 
Thakur Vrindavan Das composed Sri Chaitanya Mangal, listening to which destroys all evils.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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