श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.8.34 
कृष्ण - लीला भागवते कहे वेद - व्यास ।
चैतन्य - लीलार व्यास वृन्दावन - दास ॥34॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार व्यासदेव ने श्रीमद्भागवत में भगवान कृष्ण की समस्त लीलाओं का संकलन किया है, उसी प्रकार ठाकुर वृन्दावन दास ने भगवान चैतन्य की लीलाओं का चित्रण किया है।
 
Just as Vyasadeva has compiled all the pastimes of Krishna in the Srimad Bhagavatam, Thakur Vrindavan Das has described the pastimes of Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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