"कृपया यहाँ आइए। कृपया यहाँ आइए, परम पावन। आप उस अशुद्ध स्थान पर क्यों बैठे हैं? आपके विलाप का कारण क्या है?"
"O Sripada, please come here. Please come here. Why are you sitting in that impure place? What is the reason for your grief?"
तात्पर्य
भगवान् चैतन्य महाप्रभु और प्रकाशानन्द सरस्वती में यही अन्तर है। भौतिक जगत में हर कोई अपने को बहुत ऊँचा और महान् के रूप में परिचित कराना चाहता है पर चैतन्य महाप्रभु ने अपने आप को बहुत नम्रता और विनम्रता से परिचित किया। मायावादी एक ऊँची गद्दी पर बैठे थे और चैतन्य महाप्रभु उस जगह पर बैठे जो कि साफ भी नहीं थी। अतः मायावादी सन्यासियों ने सोचा कि किसी कारणवश वह व्यथित हुए होंगे और प्रकाशानन्द सरस्वती ने उनके दुःख के लिए कारण का पता पूछा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥