आनेर कि कथा, बलदेव महाशय ।
याँर भाव - शुद्ध - सख्य - वात्सल्यादि - मय ॥76॥
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अनुवाद
अन्यों की तो बात ही क्या, यहाँ तक कि भगवान बलदेव भी शुद्ध मैत्री तथा पितृवत प्रेम जैसी भावनाओं से परिपूर्ण हैं।
Leave aside others, even Lord Baladeva is full of feelings like pure friendship and affectionate love.
तात्पर्य
यद्यपि भगवान् बलदेव भगवान् कृष्ण के जन्म से पहले प्रकट हुए थे और इसलिए कृष्ण के पूजनीय बड़े भाई हैं, वे कृष्ण के शाश्वत सेवक के रूप में कार्य करते थे। आध्यात्मिक आकाश में सभी वैकुण्ठ ग्रहों पर चतुर्-व्यूह के नाम से जाने जाने वाले कृष्ण के चौगुने विस्तार का प्रभुत्व है। वे बलदेव के प्रत्यक्ष विस्तार हैं। सर्वोच्च प्रभु की विलक्षणता यह है कि आध्यात्मिक आकाश में हर कोई स्वयं को प्रभु का सेवक मानता है। सामाजिक परंपरा के अनुसार कोई कृष्ण से श्रेष्ठ हो सकता है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से हर कोई उनकी सेवा में लगा रहता है। इसलिए आध्यात्मिक आकाश या भौतिक आकाश में, सभी विभिन्न ग्रहों पर, कोई भी भगवान कृष्ण को पार नहीं कर सकता है या उनसे सेवा की मांग नहीं कर सकता है। इसके विपरीत, सभी भगवान कृष्ण की सेवा में लगे हुए हैं। जैसे-जैसे कोई व्यक्ति प्रभु की सेवा में अधिक संलग्न होता है, वह उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है; इसके विपरीत, जितना अधिक कोई कृष्ण की पारलौकिक सेवा से वंचित रहता है, उतना ही वह भौतिक दूषण के बुरे भाग्य को आमंत्रित करता है। भौतिक दुनिया में, यद्यपि भौतिकवादी भगवान के साथ एक होना चाहते हैं या भगवान के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं, हर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभु की सेवा में लगा हुआ है। कृष्ण की सेवा को जितना अधिक भुला देता है, उसे उतना ही मरता हुआ माना जाता है। इसलिए, जब कोई शुद्ध कृष्ण भावना विकसित करता है, तो वह तुरंत कृष्ण के प्रति अपनी शाश्वत सेवकाई विकसित करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥