साधवो हृदयं मयम साधृनां हृदयं त्वह्म्
मद अन्यत ते न जानंति नाहा तेभ्यो मनग अपि
"भक्त मेरे हृदय हैं, और मैं अपने भक्तों का हृदय हूँ। मेरे भक्त मेरे अतिरिक्त किसी और को नहीं जानते; इसी तरह, मैं अपने भक्तों के अलावा किसी और को नहीं जानता।" भगवान और उनके भक्तों के बीच का यह अंतरंग रिश्ता है।
