श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  1.5.99 
ताँहाइ प्र कट कैल वैकुण्ठ निज - धाम ।
शेष - शयन - जले करिल विश्राम ॥99॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने वैकुण्ठ को अपना धाम बनाया और भगवान शेष की शय्या पर जल में विश्राम किया।
 
There he revealed Vaikuntha as his abode and started resting in the water on the bed of Lord Shesha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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