श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  1.5.98 
जले भ रि’ अर्ध ताँहा कैल निज - वास ।
आर अर्धे कैल चौद्द - भुवन प्रकाश ॥98॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माण्ड का आधा भाग जल से भरकर उसमें अपना निवास बनाया तथा शेष आधे भाग में चौदह लोकों को प्रकट किया।
 
When half the universe was filled with water, he made his abode in it and created fourteen worlds in the remaining half.
तात्पर्य
चौदह लोकों का वर्णन श्रीमद्-भागवतम् के द्वितीय स्कन्ध के पाँचवे अध्याय में मिलता है। ऊर्ध्व लोक-मण्डल इस प्रकार हैं- (1) भूः, (2) भुवः, (3) स्वः, (4) महः, (5) जनः, (6) तपः तथा (7) सत्यः। पृथ्वी से नीचे के सात लोक हैं- (1) ताल, (2) अतल, (3) वितल, (4) नितल, (5) तलातल, (6) महातल और (7) सुतल। पृथ्वी के नीचे के सभी लोकों को पाताल कहा जाता है। ऊपरवाले लोकों में से भूः, भुवः और स्वः मिलाकर स्वर्गलोक कहलाता है, बाकी मृत्यलोक कहलाते हैं। पूरे ब्रह्माण्ड को त्रिलोक कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)