श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  1.5.88 
एइ मत गीतातेह पुनः पुनः कय ।
सर्वदा ईश्वर - तत्त्व अचिन्त्य - शक्ति हय ॥88॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवद्गीता भी बार-बार कहती है कि परम सत्य में सदैव अकल्पनीय शक्ति होती है।
 
Thus Bhagavad Gita also repeatedly says that the ultimate truth always has inconceivable power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)