गर्भोद - क्षीरोद - शायी दोंहे ‘पुरुष’ नाम ।
सेइ दुइ, झाँर अंश, विष्णु, विश्व - धाम ॥76॥
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अनुवाद
गर्भोदशायी और क्षीरोदशायी दोनों को पुरुष कहा जाता है। वे कारणोदशायी विष्णु, प्रथम पुरुष, जो समस्त ब्रह्माण्डों के अधिष्ठान हैं, के पूर्ण अंश हैं।
Both Garbhodakashayi and Kshirodakashayi are called men. He is the complete part of Karanodakasayi Vishnu, the first man and the abode of all the universes.
तात्पर्य
लघु-भागवतामृत में पुरुष के लक्षणों का वर्णन किया गया है। भगवान के अवतारों का वर्णन करते समय, लेखक ने विष्णु पुराण (6.8.59) का उद्धरण दिया है, जहाँ कहा गया है, "मैं पुरुषोत्तम, भगवान कृष्ण को नमन करता हूँ, जो हमेशा छह पदार्थों के द्वंदों के दोषों से मुक्त हैं। जिनके पूर्ण प्रसार, महा-विष्णु, सृष्टि के ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति को बनाने के लिए पदार्थ पर नज़र रखते हैं। जो खुद को विभिन्न पारलौकिक रूपों में विस्तारित करते हैं, जो सभी एक ही हैं। जो सभी जीवित संस्थाओं के स्वामी हैं। जो हमेशा स्वतंत्र हैं और भौतिक ऊर्जा के दोष से मुक्त हैं। और जब वे इस भौतिक दुनिया में प्रकट होते हैं, तो वे हम में से एक जैसे लगते हैं, हालाँकि उनके पास एक शाश्वत आध्यात्मिक, आनंदमय, पारलौकिक रूप है।" इस कथन को सारांशित करते हुए, रूप गोस्वामी ने निष्कर्ष निकाला है कि भगवान का पूर्ण विस्तार जो भौतिक ऊर्जा के सहयोग से कार्य करता है उसे पुरुष कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥