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अनुवाद
"मैं कहाँ हूँ, सात इंच का एक छोटा सा प्राणी, जो मेरे हाथ के बराबर है? मैं तो प्रकृति, सम्पूर्ण भौतिक ऊर्जा, मिथ्या अहंकार, आकाश, वायु, जल और पृथ्वी से बने ब्रह्मांड में घिरा हुआ हूँ। और आपकी महिमा क्या है? आपके शरीर के रोमछिद्रों से अनंत ब्रह्मांड गुजरते हैं, जैसे धूल के कण खिड़की के छिद्र से गुजरते हैं।"
"Where am I, a tiny creature measuring seven feet by the size of my hand? I am surrounded by material nature, all material energy, false ego, this universe composed of sky, air, water, and earth. And what is your glory? Countless universes emanate from the pores of your body, just as dust particles emanate from a window pane."
तात्पर्य
जब भगवान ब्रह्मा ने कृष्ण के सभी बछड़ों और गोप बालकों को चुरा लिया, वापस लौटने पर यह देखकर कि बछड़े और बालक अभी भी कृष्ण के साथ घूम रहे हैं, उन्होंने अपनी हार में यह प्रार्थना (भागवत 10.14.11) प्रस्तुत की। एक बद्ध आत्मा, यहाँ तक कि ब्रह्मा जैसा महान, जो पूरे ब्रह्मांड के मामलों का प्रबंधन करता है, ईश्वर के व्यक्तित्व से तुलना नहीं कर सकता, क्योंकि वह केवल अपने शरीर के छिद्रों से निकलने वाली आध्यात्मिक किरणों से ही अनगिनत ब्रह्मांडों का निर्माण कर सकता है। भौतिक वैज्ञानिकों को ईश्वर की तुलना में हमारी तुच्छता के बारे में श्री ब्रह्मा के कथनों से सबक लेना चाहिए। ब्रह्मा की इन प्रार्थनाओं में उन लोगों के लिए सीखने के लिए बहुत कुछ है जो शक्ति के संचय से झूठे तौर पर फुलाए गए हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥