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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.5.69 
पुनरपि श्वास यबे प्रवेशे अन्तरे ।
श्वास - सह ब्रह्माण्ड पैशे पुरुष - शरीरे ॥69॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब वे श्वास लेते हैं तो समस्त ब्रह्माण्ड पुनः उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
 
Then, when he breathes, all the universes again enter his body.
तात्पर्य
कारणोदकशायी विष्णु के रूप में भगवान विष्णु प्रकृति को अपने दर्शन से गर्भित करते हैं। उस दृष्टि के पारलौकिक अणु आत्मा के कण, या आध्यात्मिक परमाणु होते हैं, जो पिछली ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति से अपने व्यक्तिगत कर्म के बीजों के अनुसार जीवन की विभिन्न प्रजातियों में प्रकट होते हैं। और स्वयं भगवान, अपने आंशिक प्रतिनिधित्व द्वारा, असंख्य ब्रह्मांडों के शरीर का निर्माण करते हैं और फिर से उन ब्रह्मांडों में से प्रत्येक में गर्भोदकशायी विष्णु के रूप में प्रवेश करते हैं। माया के साथ उनके संपर्क आने की व्याख्या भगवद-गीता में वायु और आकाश के बीच एक तुलना द्वारा की गई है। आकाश हर भौतिक चीज़ में प्रवेश करता है, फिर भी यह हमसे बहुत दूर है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)