श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  1.5.57 
माया - शक्ति रहे कारणाब्धिर बाहिरे ।
कारण - समुद्र माया परशिते नारे ॥57॥
 
 
अनुवाद
माया-शक्ति करण सागर के बाहर निवास करती है। माया इसके जल को छू नहीं सकती।
 
The illusory energy resides outside the causal ocean. Maya cannot touch its waters.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)