श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.5.48 
तुरीय, विशुद्ध - सत्त्व, ‘सङ्कर्षण’ नाम ।
तिंहो याँर अंश, सेइ नित्यानन्द - राम ॥48॥
 
 
अनुवाद
वह संकर्षण, जो दिव्य शुद्ध सत्व है, नित्यानंद बलराम का आंशिक विस्तार है।
 
He is the partial expansion of the divine pure being Sankarshana Nityananda Balarama.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd