श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.5.48 
तुरीय, विशुद्ध - सत्त्व, ‘सङ्कर्षण’ नाम ।
तिंहो याँर अंश, सेइ नित्यानन्द - राम ॥48॥
 
 
अनुवाद
वह संकर्षण, जो दिव्य शुद्ध सत्व है, नित्यानंद बलराम का आंशिक विस्तार है।
 
He is the partial expansion of the divine pure being Sankarshana Nityananda Balarama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)