श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.5.44 
षड् - विधैश्वर्य ताँहा सकल चिन्मय ।
सङ्कर्षणेर विभूति सब, जानिह निश्चय ॥44॥
 
 
अनुवाद
ये छह गुण आध्यात्मिक हैं। यह निश्चित जान लो कि ये सभी संकर्षण के ऐश्वर्य की अभिव्यक्तियाँ हैं।
 
All six opulences are spiritual. Know for certain that they are all manifestations of the opulence of Sankarshana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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