श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.5.42 
ताँहा ये रामेर रूप - महा - सङ्कर्षण ।
चिच्छक्ति - आश्रय तिंहो, कारणेर कारण ॥42॥
 
 
अनुवाद
वहाँ [आध्यात्मिक आकाश में] बलराम का महासंकर्षण नामक स्वरूप आध्यात्मिक शक्ति का आश्रय है। वे आदि कारण हैं, समस्त कारणों के कारण हैं।
 
There (in the sky), the embodied form of Lord Balarama, known as Mahasankarshana, is the abode of spiritual energy. He is the root cause, the cause of all causes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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