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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.5.4 
सर्व - अवतारी कृष्ण स्वयं भगवान् ।
ताँहार द्वितीय देह श्री - बलराम ॥4॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण सभी अवतारों के मूल हैं। भगवान बलराम उनके दूसरे शरीर हैं।
 
Lord Krishna, the Supreme Personality of Godhead, is the source of all incarnations. Lord Balarama is His second incarnation.
तात्पर्य
भगवान् श्री कृष्ण, पूर्ण परमेश्वर, प्राचीन भगवान्, परमेश्वर के मूल रूप हैं और उनका पहला विस्तार श्री बलराम है। परमेश्वर स्वयं का अनगिनत रूपों में विस्तार कर सकते हैं। जो रूप असीमित शक्ति रखते हैं उन्हें स्वांश कहा जाता है, और वे रूप जिनमें सीमित शक्ति होती है (जीवित इकाईयाँ) को विभिन्रांश कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)