श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.5.30 
सालोक्य - सामीप्य - सार्टि - सारूप्य - प्रकार ।
चारि मुक्ति दिया करे जीवेर निस्तार ॥30॥
 
 
अनुवाद
वे पतित जीवों को चार प्रकार की मुक्ति प्रदान करके उनका उद्धार करते हैं - सालोक्य, सामीप्य, साृष्टि और सारूप्य।
 
He saves the fallen souls by providing them four types of salvation – Salokya, Samipya, Sarti and Sarupya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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