श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.5.29 
यद्यपि केवल ताँर क्रीड़ा - मात्र धर्म ।
तथापि जीवेरे कृपाय करे एक कर्म ॥29॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि उनकी लीलाएँ ही उनके एकमात्र विशिष्ट कार्य हैं, फिर भी अपनी अहैतुकी कृपा से वे पतित आत्माओं के लिए एक कार्य संपन्न करते हैं।
 
Although His pastimes are His exclusive activities, He performs one task for the fallen souls by His causeless mercy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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