श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.5.26 
पर - व्योम - मध्ये क रि’ स्वरूप प्रका श ।
नारायण - रूपे करेन विविध विलास ॥26॥
 
 
अनुवाद
आध्यात्मिक आकाश के वैकुंठ लोकों में भगवान नारायण के रूप में अपनी पहचान प्रकट करते हैं और विभिन्न प्रकार से लीलाएँ करते हैं।
 
In the Vaikuntha worlds of the sky, Lord Narayana appears in his form and performs various pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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