श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  1.5.230 
से वैष्णवेर पद - रेणु, तार पद - छाया ।
अधमेरे दिल प्रभु - नित्यानन्द - दया ॥230॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द की कृपा से इस पतित आत्मा को वैष्णवों के चरणकमलों की धूलि और छाया प्राप्त हुई है।
 
It is only by the grace of Lord Nityananda that this fallen soul has been able to receive the dust and shade of the lotus feet of the Vaishnavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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