श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  1.5.228 
वृन्दावने वैसे यत वैष्णव - मण्डल ।
कृष्ण - नाम - परायण, परम - मङ्गल ॥228॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावन में रहने वाले सभी वैष्णव समूह कृष्ण के सर्वमंगलमय नाम का जप करने में तल्लीन रहते हैं।
 
All the Vaishnavas living in Vrindavan are engrossed in chanting the most auspicious name of Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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