| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 227 |
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| | | | श्लोक 1.5.227  | हेन ये गोविन्द प्रभु, पाइनु याँहा हैते ।
ताँहार चरण - कृपा के पारे वर्णिते ॥227॥ | | | | | | | अनुवाद | | अतः जिनके द्वारा मुझे इन भगवान गोविन्द की शरण प्राप्त हुई है, उनके चरणकमलों की कृपा का वर्णन कौन कर सकता है? | | | | Therefore, who is there who can describe the grace of those feet of Nityananda, through which I have taken refuge in Lord Govinda? | | ✨ ai-generated | | |
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