श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 226
 
 
श्लोक  1.5.226 
सेइ अपराधे तार नाहिक निस्तार ।
घोर नरकेते पड़े, कि बलिब आर ॥226॥
 
 
अनुवाद
उस अपराध के लिए उसे मुक्ति नहीं मिल सकती। बल्कि, वह एक भयानक नारकीय स्थिति में गिर जाएगा। इससे ज़्यादा मैं क्या कहूँ?
 
Because of that crime, he can never be free. Indeed, he will be sent to hell. What more can I say?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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