श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  1.5.222 
चौद्द - भुवने याँर सबे करे ध्यान ।
वैकुण्ठादि - पुरे याँर लीला - गुण गान ॥222॥
 
 
अनुवाद
चौदह लोकों में सभी लोग उनका ध्यान करते हैं और वैकुण्ठ के सभी निवासी उनके गुणों और लीलाओं का गान करते हैं।
 
All the people of the fourteen worlds meditate on Him and all the inhabitants of Vaikuntha-loka sing of His virtues and pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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