vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ
»
श्लोक 222
श्लोक
1.5.222
चौद्द - भुवने याँर सबे करे ध्यान ।
वैकुण्ठादि - पुरे याँर लीला - गुण गान ॥222॥
अनुवाद
चौदह लोकों में सभी लोग उनका ध्यान करते हैं और वैकुण्ठ के सभी निवासी उनके गुणों और लीलाओं का गान करते हैं।
All the people of the fourteen worlds meditate on Him and all the inhabitants of Vaikuntha-loka sing of His virtues and pastimes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×