श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 217
 
 
श्लोक  1.5.217 
मो - अधमे दिल श्री - गोविन्द दरशन ।
कहिबार कथा नहे अक थ्य - कथन ॥217॥
 
 
अनुवाद
मुझ जैसे तुच्छ व्यक्ति को उन्होंने भगवान गोविन्द के दर्शन प्रदान किये। इसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता, न ही यह बताने योग्य है।
 
He showed me, a wretch like me, the vision of Lord Govinda. Words cannot describe it, nor would it be appropriate to express it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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